मीरा मेघमाला सचेत कवि हैं। जाहिर है साहसी और स-तेज भी। ऐसे समय में जब अधिकांश कवयित्रियां राजनीति से कन्नी काटती विमर्शों से सुरक्षात्मक दूरी बनाए रखती हों (स्त्री प्रेम और परिवार को छोड़ कर) मीरा अपनी पक्षधरता तय करती हैं और वह भी पूरे काव्य सौन्दर्य के साथ। जब प्रतिबद्धता कविता में तय करना भी खतरनाक हो मीरा कविता के बाहर भी अपनी प्रतिबद्धता सुनिश्चित करती हैं। फेसबुक पर राजनीतिक विश्लेषण करती उनकी मुखर टिप्पणियां मैंने देखी हैं। उनके यहाँ व्यत्तिगत संघर्ष और करुणा का सक्रिय विस्तार प्रकृति और पशु-पक्षियों तक है। उनकी गहन काव्य संवेदनाएं अत्यंत मार्मिक हैं। आशा है दक्षिण के इस चर्चित काव्य-स्वर का हिन्दी कविता परिवार में उल्लसित स्वागत होगा। हिन्दी में उनके पहले काव्य संग्रह के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ। - देवेन्द्र आर्य