Ek Naakaam Safar


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About The Book

दिबाचा एक नाकाम सफर का वजुद में आना एक नाकाम सफर का हासिल हैबाज औकात हम इंसान अपनी कोशिशों और अपनी काबिसों के बावजुद भी अपनी मंजिल और मकामात से बिलकुल महरूम रह जाते हैं ऐसी सुरत ऐ हाल में हमें हमारी जिंदगी बोझ मालुम होने लगती है और हम तसव्वुर के उस राह लग जाते हैं जहाँ सिर्फ और सिर्फ मेहरूमी और मायुसी नजर आती है मुस्तकिल उदासी के सबब हमारा दिल अफसुरदगी के मरकज में तबदिल हो जाता है और फिर हम अपनी उस बेकरारी को जो जबानी तौर पे जाहिर करना नामुमकिन है उसे अलफाज की सकल देते हैं और अलफाज को गजलियात और नजम की सूरत में तबदील करके बयान करते हैं जैसा कि मेरे करीब है लेकिन मेरे करीब नहीं ये सिलसिला रब्त क्या अजीब नहीं वो ख्वाब में मेरा है सिर्फ मेरा है हकिकतन में वो मेरा मेरे नसिब में एक नाकाम सफर इंसानी जजबात और अहसासात पे मौकुफ है जिंदगी और मौत की मुकम्मल तरजमानी और साथ ही साथ इश्क वो मोहब्बत के फलसफे को ब्यान करने की कोशिश की गई है। अलबत्ता जहाँ तक फन ऐ सायरी का ताल्लुक है तो एक नाकाम सफर के दामन में चन्द काँटों के अलावा कुछ भी नहीं निगाह-ए-हरफ ए आसना में और अगर एहल-ए-नजर की बात करूँ तो यकिनन अहल-ऐ-नजर के करीब एक नाकाम सफर काबील-ए-ऐहतराम है और फिर हमारे मोआसरे में बाज अफराद ऐसे भी पाये जाते हैं जिन्हें कलमकारी से सख्त नफरत है वो लोग इन सब चिजों से गुरेज करते हैं उनके नजदीक कलमकारों के हैसियत चाहे शायर हो कबी हो अफसाना निगार हो पागलों की सी है सो हमारी छोटी सी कोशिश है उनलोगों के दिलों से इस नहुसत और गलत फेहमी को निकाल फेंकने के मोतालिक एक नाकाम सफर की सूरत में।
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