Ek Osho Shishya Ki Antaryatra (एक ओशो शिष्य की अंतर्यात्रा)


Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.

LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE

About The Book

कुछ भी लिखने के पूर्व मैं अपने प्यारे गुरु ओशो के कमलवत चरणों में प्रणाम निवेदित करता हूं। क्योंकि आज मैं जो लिखने को प्रेरित हुआ हूं वह उन पावन चरणों के आशीष से ही ठीक ढंग से पूर्ण हो सकेगा। यह ख्याल लगभग दो माह से मेरा पीछा करता रहा है कि वर्ष 1984 के उन दिनों का जिक्र मित्रों से करूं जब ओशो ने अपने कुछ शिष्यों के सम्बुद्ध होने की घोषणा की थी। मैं इस भाव को टालता रहा कि बात आई-गई हो गई। उसका क्या जिक्र करना । पर जितना ही टालना चाहा लिखने का भाव उतना ही बल पकड़ता गया और अंततः उस अंत:प्रेरणा के समक्ष समर्पित आपके सामने खड़ा हूं। ऐसा लगता है ओशो से संबंधित जरा सी भी बात जो आज भले ही कितनों को कम महत्वपूर्ण लगती हो लिपिबद्ध कर देना आवश्यक है। ऐसा न करना गुरुभाइयों के प्रति अपराध होगा बेईमानी होगी। गुरु भाइयों से मेरा आशय ओशो के ही शिष्यों से नहीं बल्कि कभी भी जो किंही सदगुरु के शिष्य होंगे उन सब से है। अस्तुः
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Fast Delivery
Fast Delivery
Sustainably Printed
Sustainably Printed
downArrow

Details