ध्यान क्या है-: ध्यान तो शुद्ध रूप से एक समझ है। यह प्रश्न केवल शांत होकर बैठ जाने का नहीं है न यह प्रश्न मंत्रजाप करने का है। यह प्रश्न तो मन की सूक्ष्म कार्यविधि को समझने का है। यदि तुम मन की कार्यविधि को एक बार समझ गये तुम्हारे अंदर एक बहुत बड़ी जागरुकता या एक होश का उदय होता है जिसका मन से कोई सम्बन्ध नहीं। इस जागरूकता का उदय तुम्हारे अस्तित्व से तुम्हारी आत्मा और चेतनता से होता है।एक साधे सब सधे-: उनके शब्द निपट जादू हैं__ -अमृता प्रीतमभारत ने अब तक जितने विचारक पैदा किए हैं वे उनमें सबसे मौलिक सबसे उर्वर सबसे स्पष्ट और सर्वाधिक सजनशील विचारक थे। उनके जैसा कोई व्यक्ति हम सदियों तक न देख पाएंगे। ओशो के जाने से भारत ने अपने महानतम सपूतों में से एक खो दिया है। विश्वभर में जो भी खुले दिमाग वाले लोग हैं वे भारत की इस हानि के भागीदार होंगे।खुशवंत सिंह सुविख्यात पत्रकार एवं लेखक