Ek Sahityaik Ki Diary


Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.

LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE

About The Book

गजानन माधव 'मुक्तिबोध' (1917–1964) हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि निबंधकार आलोचक और विचारक थे जिन्हें प्रगतिशील कविता और नई कविता के बीच सेतु माना जाता है। उनका जन्म 13 नवंबर 1917 को मध्य प्रदेश के श्योपुर में हुआ था। मुक्तिबोध की रचनाएँ आधुनिक मानव की जटिल चेतना सामाजिक विसंगतियों और अस्तित्ववादी संघर्षों को गहराई से उजागर करती हैं। उनकी कविताओं में मार्क्सवादी दृष्टिकोण के साथ मनोवैज्ञानिक विश्लेषण और दार्शनिक प्रश्नों की झलक मिलती है। जटिल प्रतीकों कठिन बिंबों और तीखे यथार्थवादी विवरणों से युक्त उनकी भाषा पाठक को चुनौती देती है। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'चाँद का मुँह टेढ़ा है' और लंबी कविता 'अंधेरे में' शामिल हैं। मुक्तिबोध के साहित्य में अलगाव शोषण के विरुद्ध संघर्ष मानवीय पीड़ा और सामाजिक-राजनीतिक विडंबनाएँ केंद्रीय स्थान रखती हैं। उनकी रचनाएँ व्यक्ति के आंतरिक द्वंद्व और बाह्य यथार्थ के बीच की खाई को दर्शाती हैं। उन्होंने साहित्य को केवल कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का साधन माना। उनकी आलोचनात्मक दृष्टि ने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी। आज भी उन्हें प्रगतिशील विचारधारा और आधुनिक हिंदी कविता के स्तंभ के रूप में याद किया जाता है। मुक्तिबोध की रचनाएँ पाठकों को न केवल विचारों से टकराती हैं बल्कि उन्हें समाज और स्वयं के प्रति प्रश्न करने के लिए प्रेरित भी करती हैं।
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Fast Delivery
Fast Delivery
Sustainably Printed
Sustainably Printed
downArrow

Details