लोग नहीं जानते कि मैं भी एक सीता हूँ: मैंने सीता के संताप को महसूस किया है राजा राम के दरबार में अग्नि परीक्षा दी है! कभी कहना चाहती हूँ कि अंगारों पर चलते हुए पैरों में छाले पड़ गए थे परन्तु सृजन का एक अनकहा एहसास मेरे होठों पर अपनी तर्जनी रख देता है- मेरा मौन गहराता जाता है!