प्रेमचंद का उपन्यास ‘गबन’ भारतीय समाज में नैतिकता लालच और सम्मान की जटिल परिभाषाओं को गहराई से उजागर करता है। यह कहानी है रमेश और जालपा की; एक ऐसे दंपत्ति की जो वैभव और प्रतिष्ठा की चाह में धीरे-धीरे नैतिक पतन की ओर बढ़ते हैं। जालपा आभूषणों के मोह में बंधी है और रमेश अपनी पत्नी को प्रसन्न करने के लिए झूठ और कर्ज के दलदल में फंसता चला जाता है। ‘गबन’ केवल एक व्यक्ति की त्रुटि की कथा नहीं है बल्कि उस समाज का दर्पण है जहाँ बाहरी चमक-दमक के पीछे मानवीय मूल्यों का क्षय होता जा रहा है। प्रेमचंद की लेखनी इस उपन्यास को एक कालजयी सामाजिक दस्तावेज़ बना देती है जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना अपने समय में था। Premchand Gaban Hindi literature Indian classics social novel moral conflict greed respect middle-class life Indian society ethical dilemma classic fiction realism Ramesh and Jalpa corruption human values timeless story Indian author moral downfall social commentary