राधाकृष्ण की पहचान प्रेमचंद-धारा के लेखक के रूप में प्रेमचंद के जीवनकाल में ही बन चुकी थीं। 'गेद और गोल’ उनकी सहज कहानियों का संकलन है। आम लोगों के आम दिनों की कुछ खास बातें इन कहानियों में सहज ही दर्ज हो गई हैं। ये कहानियाँ 'फॉर्मूला’ कहानी नहीं हैं जिन्हें एक सुनिश्चित प्लॉट के तहत गढ़ा गया हो। ये बहते जीवन से कुछ पल सँजोकर पेश की गई हैं। इनमें आर्थिक तंगी है तो व्यवहारिकता भी। उद्दंडता है तो आदर्श भी। फरेब है तो सच्चा प्रेम भी। शीर्षक कहानी 'गेंद और गोल’ बहुत कम शब्दों में जि़ंदगी के लक्ष्य को बयाँ कर देती है। 'गठरी का भेद’ पंचतंत्र की कहानी की तरह सहज सीख देते हुए तीव्र प्रहार करती है। 'कोयले की जि़ंदगी’ 'कलाकार का मास्टरपीस’ 'मूल्य’ 'रसायन की पुड़िया’ हर रंग की कहानी इस संकलन में आपको मिल जाएगी। 70 के दशक में लिखी गई ये कहानियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक और हृदयस्पर्शी हैं।
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