Gaon Ke Garibon Se
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वला. इ. लेनिन की कृति ‘गाँव के ग़रीबों से’ 1903 में रूस में स्वतःस्फूर्त किसान आन्दोलन के उभार के समय लिखी गयी थी। यह किसानों के लिए लेनिन का पहला सम्बोधन है और इसमें कम्युनिस्ट पार्टी के बुनियादी ध्येयों और ज़मीन से सम्बन्धित उसके कार्यक्रम का वैज्ञानिक और सुबोध ढंग से विश्लेषण किया गया है। किसानों की वर्गीय संरचना के विश्लेषण के आधार पर लेनिन इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि गाँव के ग़रीब लोग सिर्फ़ मज़दूर वर्ग से मिलकर शोषण से स्वतंत्रता पा सकते हैं क्योंकि मज़दूर वर्ग वह एकमात्र शक्ति है जो न सिर्फ़ भूदास-प्रथा के अवशेषों का उन्मूलन करने और राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल करने के लिए किसानों की लड़ाई का नेतृत्व कर सकता है बल्कि गाँव के ग़रीब लोगों के साथ मिलकर उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व को ख़त्म करने और समाजवादी रूपान्तरणों को अमल में लाने में समर्थ है।
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