लेखिका ने अपनी इस कृति मे पौराणिक काल से लेकर वर्तमान काल तक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रेरक एवं अनुकरणीय कार्य करने वाली पचास से भी अधिक नारियों की गरिमामयी गाथाओं को लिपिबद्ध किया है। इनमें मैत्रयी गार्गी की गौरव गाथा है तो कौशल्या सीता उर्मिला अहिल्या और शबरी की गाथाएं भी हैं। द्रौपदी दमयन्ती और सावित्री की प्रेरक कथाओं के साथ-साथ क्षत्राणी पद्मिनी पन्नाधाय एवं हाड़ी रानी की प्रेरक झलकियाँ भी है। नारी गरिमा की प्रतीक रानी दुर्गावती अहिल्याबाई होल्कर जीजाबाई और शौर्य की प्रतिमूर्ति झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई बलिदानी झलकारी बाई और अवन्ति बाई लोधी की कथाएँ भी लेखिका श्री मति सुलक्ष्मी अग्रवाल ने अपनी इस कृति को अत्यंत मनोयोग पूर्वक संजोई है।