पंचकन्या — वे पाँच स्त्रियाँ जो नारीत्व की सीमाओं में नहीं उसकी संभावनाओं में रची गईं। अहल्या द्रौपदी तारा मंदोदरी और कुंती — ये पाँचों स्त्रियाँ पौराणिक कथाओं का हिस्सा हैं लेकिन उनका जीवन केवल किसी की पत्नी माता या पुत्री बनकर नहीं बीता। वे संघर्ष की धूप में तपकर अनुभव की अग्नि में जलकर और समय के न्याय-अन्याय से टकराकर अपनी पहचान स्वयं गढ़ती हैं।