ये मेरा पांचवां गीत संग्रह है। 1990 के बाद लिखे गीतों में से चुने (82) गीत तिथिवार इसमें संकलित हैं। शिल्पगत एकरसता और शैलीगत थकान से उबरने के लिए इस दौरान भी कविताएं ग़जलें लिखता रहा और उनके संकलन भी आते रहे। मैं गीत-ग़जल को भी कविता का ही अंग और अंश मानता रहा हूं। गीत-ग़जल यानी अलग कहन भंगिमा और प्रभाव की कविता। छंद-वैशिष्ट के कारण अलग से नामांकित होती रहीं इन कविताओं को मैंने हिन्दी कविता (फ्री वर्स) के आईने में ही देख ने-परखने-रचने की चेष्टा की है। मेरे लिए गीत की आत्मगत परिधि-सीमित परिभाषाएं अमान्य रही हैं। -देवेन्द्र आर्य
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