जीवन विविधताओं एवं विसंगतियों से आवृत्त प्रकृति का एक अनुपम उपहार है। इसके सुचारू संचरण हेतु मूल्यों से परिपूर्ण मानकों की आवश्यकता अपेक्षित है इसकी अर्थपूर्णता और उद्देश्यपूर्णता निरापद इसके सौंदर्य को विस्तारित करती है। एक शोधपरक व जीवंत समाज की जितनी विधायें विद्यमान है निसंदेह कविकर्म इन विधाओं का अग्रदूत है। जीवन के अभीष्ट हेतु एक रचनाकार का भी उतना उत्तरदायित्व है जितना किसी अन्य का।कुछ ऐसी ही भावनाओं से आवृत्त मेरा यह काव्यसंग्रह गीतिका छोटे छोटे मुक्तकों के माध्यम से इस पर प्रकाश डालने का एक संक्षिप्त पर सफल प्रयास है और सदा की भाँति सुधी पाठकों के आशीर्वाद का आँकक्षी है। मैं आभारी हूँ साहित्य पीडिया पब्लिकेशन समूह के समर्पित टीम का जिनके सार्थक प्रयास से यह काव्यसंग्रह आपके समक्ष मूर्त रूप को प्राप्त हुआ।एक बार पुनः समस्त साहित्यजगत का आभार व सुधी पाठकों को मेरा सादर नमन-आप सबकी पावन प्रतिक्रिया का आकांक्षी-निर्मेष
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