इसे ग़ज़ल का ककहरा सीखने वालों के लिए मानक ग्रन्थ कहा जा सकता है। यह किताब विशेष कर देवनागरी में ग़ज़ल कहने वालों के लिए किसी उस्ताद से कम नहीं। यहाँ उनकी तलाश ख़त्म होती है अब वे स्वयं अपनी ग़ज़लों की इस्लाह कर सकते हैं। ग़ज़ल के बारे में देवनागरी में बिखरा-बिखरा बहुत कुछ ज्ञान मिल जाता है लेकिन बहुत सी अंदरूनी बातें नहीं मिलतीं जो इस पुस्तक में आ गयी हैं।