कुछ ही वर्षों पूर्व सर्दियों की एक बेहद ठंडी रात में मेरे घर के पीछे एक चौपाये प्राणी ने पाँच बच्चों को जन्म दिया।. बस वहीं से शुरू हुआ उन बेजुबानों के सुख-दुःख मोह-माया मौज-मस्ती प्रेम-द्वन्द रोग-शोक मिलन- विछोह और जीवन-मृत्यु के लम्हों को कलमबद्ध करना। नियति ने कुछ सोचकर ही उन्हें मेरे पास भेजा होगा।. उनके साथ मेरे सारे अनुभवों ने मुझे इस तरह प्रेरित किया कि मैं उन सारी रोंगटे खड़े कर देने वाली अक्षरशः सत्य घटनाओं को दुनिया के सामने लाऊँ और बस इसी सोच ने जन्म दिया- “घुटन - एक सत्य कथा को।