लघु कथाओं का मकसद होता है छोटे में गहरी बात कहना। श्री भगवती प्रसाद गेहलोत के लघु कथा संग्रह ‘गिलोल’ में ऐसी ही लघु कथाएं हैं जिनमें कई सामाजिक मुद्दे उठाए गए हैं। इनमें सरकारी दफ्तरों की लाल फीता शाही पर प्रहार है तो सरकारी स्कूल के शिक्षकों और बच्चों के प्रति प्रशासन का वह रवैया भी है इससे वंचित घरों से आए बच्चों की शिक्षा ठीक से नहीं हो पाती। दूसरी ओर हमारी सामाजिकता में उग आई बुराइयों के बारे में भी बात है। बच्चों की उपेक्षा सहते बुजुर्ग माता-पिता की व्यथा समाज के कुछ हिस्सों में अब भी व्याप्त छुआछूत आदि पर भी कलम चलाई है। पंडित जी को बेवजह रुपए देना और कठोर श्रम करने वाला मजदूर के पैसे काट लेना जैसी विसंगतियां भी इन कथाओं में दर्शाई है। आधुनिक समय में हम लोगों की ऐसी आदतों पर भी प्रश्न चिह्न है जिनके तहत हम माल के ग्लैमर के वशीभूत होकर मोल-भाव भी नहीं करते मगर गरीब फेरी वालों को मोल-भाव करके निचोड़ लेना चाहते हैं।--निर्मला भुराड़िया
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