गीता अंतरंग प्रवेश नामक इस पुस्तिका का यही उद्देश्य है कि सभी भक्त साधक और ज्ञान अन्वेषक को एक सही मार्ग मिले जिसपर चलकर उन्हें ईश्वर के सान्निध्य महसूस कर पाने के लिए जरूरी आत्मबल और आत्मज्ञान मिल सके। विड़म्बना इस बात कि है कि हमारे सभी इन्द्रिय बाहर कि दिशा में ही सक्रीय रहते हैं और हमें यह भी महसूस करा पाने में असमर्थ रह जाते हैं जिसके आधार पर हम यह सत्यापित कर पाएं कि हमारा प्राण संचारक ऊर्जा का केन्द्रक ही देवत्व का अधिष्ठान है और वहीं से जीवात्मा परमात्मा और अंतरात्मा का विस्तार व्याप्त होता रहता है और हम दिए हुए जीवन उद्दीपना को महसूस करते रहते हैं जबतक कि मौत का फरमान न आता हो।.