मैं ब्रह्म के साथ उत्पन्न हुआ। मैं तब भी था जब कुछ नहीं था मैं अब भी हूँ जब कुछ नहीं है और मैं आने वाले सभी युगों में उपस्थित रहूँगा। मैं समय हूँ और किसी की प्रतीक्षा नहीं करता। परन्तु आज तुम्हें कलियुग के एक शापित योद्धा की कहानी सुनाने के लिए स्थिर खड़ा हूँ।<br> यह कलियुग में बुराई पर अच्छाई की जीत की कथा है घोर अत्याचार में भी आशावादी होने के रोमाँच की कथा है प्रतिकूल वास्तविकता से उपजे एक अनुकूल स्वप्न की कथा है। यह एक महान योद्धा एक महा प्रतापी राजा व्यास के पुत्र और इक्ष्वाकु के वंशज चरित्रनायक एकलव्य के उदय की कथा है।