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About The Book

गृहदाह एक ऐसे धन सम्पन्न युवक की असफलता की कहानी है जो अपने धन के प्रभाव और अपनी मक्कारियों द्वारा पहले तो अपने एक निर्धन मित्र की मंगेतर और उसके पिता को प्रभावित करके उसके साथ विवाह करने का प्रयास करता है। लेकिन जब उसे सफलता नहीं मिलती तो धोखे से उसे उड़ा ले जाता है। पराये शहर में दोनों पति-पत्नी के रूप में रहते हैं। लेकिन इतने प्रयत्न करने पर भी वह उस युवती से वह सब कुछ पाने में सफल नहीं हो पाता जिसे पाने के लिए उसने मित्रघात किया था।<br>गृहदाह एक ऐसी अभागिन युवती कीं कहानी भी है जिसे परिस्थितियों ने पति से दूर कर दिया। दो नावों में सवार युवती भली-भांति जानती है कि न तो उसे उसका पति स्वीकार कर सकता है और न वह अपने पति के धोखेबाज मित्र को ही पति रूप में स्वीकार कर सकेगी।
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