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About The Book
Description
Author
मैं लेखक की पांडुलिपि पढ़ने और संशोधन करने की सहभागी रही। लेखक ने सामान्य इंसान के मस्तिष्क में उपजे उलझे-अनकहे प्रश्नों में से अपनी कहानियों का कथानक चुना है। कहानियाँ इन उलझे प्रश्नों के वर्णन तक ही सीमित नहीं है अपितु लेखक ने मानवीय मूल्यों के आधार पर इन प्रश्नों के जवाबों को भी ढूँढने की कोशिश की है। इस क्रम में इंसानी रिश्ते की कोमल भावनाओं को भी इन कहानियों में बड़ी ख़ूबसूरती के साथ प्रदर्शित किया गया है। उलझे प्रश्नों में जन्मी कहानियाँ आगे बढ़ते-बढ़ते अपने उत्कर्ष को छू लेने के बाद सकारात्मक समापन को प्राप्त कर लेती हैं। कहानियों के साथ बहते-बहते कई पल ऐसे आते हैं जब मन में भावनाएँ अचानक कसक बनकर उभर उठती हैं और दिल की गहराइयों को छू लेती हैं। - विजयंती