मन मे विरह वेदना उत्साह और लोगों के मन को छूने की चाहत जब प्रस्फुटित हुई तो कुछ पंक्तियाँ बन गईं और यही से शुरू हुई गुमनाम शायर के सफर की। पाओलो कोहेलो की लिखी पंक्तियाँ ''जब तुम सिद्दत से किसी चीज़ को चाहो तो पूरी कायनात तुम्हे उससे मिलने की साज़िश रचती है'' गुमनाम शायर के जीवन पर सटीक बैठती है। एक बार कविता बननी शुरू हुई तो सफर चल पड़ा जिसमे मुलाकात होती गयी कई बड़े लेखकों और उनके लिखे लेख कविता और ग़ज़लों से इस तरह जो एक सफर शुरू हुआ था कुछ पंक्तियों के साथ अब कारवाँ बन गया है कविताओं का। कविताएं जो लोगों को रुलाती हैं हँसाती है और प्रोत्साहित करती है। कविताएँ जो दिल पर किसी पंख सी नरम हैं वही ज्वलंत मुद्दों में पत्थर सी अडिग। गुमनाम शायर एक व्यक्ति ना हो के खुद कविता है हर पढ़ने वाला हर कविता में अपने लिए कुछ ना कुछ पाता है।
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