गुरु परताप साध की संगति :ओशो स्वयं तूफानों के पाले हुए थे। और उनका अक्षर-अक्षर मुहब्बत का दीया बनकरउन तूफानों में जलता रहा... जलता रहेगा। जिस ओशो से मैंने बहुत कुछ पाया है यह अक्षर उन्हीं के नाम- अर्पित करती हूं -कह दो मुखालिफ हवाओं से कह दो मुहब्बत का दीया तो जलता रहेगा...''अमृता प्रीतमजीवन अमृत :ओशो के प्रखर विचारों ने ओजस्वी वाणी ने मनुष्यता के दुश्मनों पर संप्रदायों पर मठाधीशों पर अंधे राजनेताओं पर जोरदार प्रहार किया। लेकिन पत्र-पत्रिकाओं ने छापीं या तो ओशो पर चटपटी मनगढंत खबरें या उनकी निंदा की भ्रम के बादल फैलाए। ये भ्रम के बादल आड़े आ गये ओशो और लोगों के। जैसे सूरज के आगे बादल आ जाते हैं। इससे देर हुई। इससे देर हो रही है मनुष्य के सौभाग्य को मनुष्य तक पहुंचने में।
Piracy-free
Assured Quality
Secure Transactions
Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.