ग्यारवीं क्लास की लड़की: यह कहानी है एक ऐसी लड़की की जो जीवन में अपनी मेहनत के दम पर सफलता पाना चाहती है। गांव में पैदा हुई इस लड़की का जीवन संघर्ष से भरा हुआ है। उसके जीवन में बहुत सारी मुसीबतें आती हैं जिनका वह डटकर सामना करती हैं। बहनों के आपसी प्रेम पति-पत्नी के विश्वास के दम पर वह अपने जीवन में कामयाब होती है। अपने जीवन में यह लड़की अनेक प्रकार के शोषण का सामना करती है। इस कहानी में यह भी दर्शाया गया है कि हमारा रूढ़िवादी समाज बेटों और बेटियों में बहुत अंतर समझता है। समाज की यह सोच है कि बेटा यदि निकम्मा हो तो भी वह अच्छा है और बेटी यदि बहुत अधिक प्रतिभाशाली है तो भी कोई बड़ी बात नहीं। इस कहानी में यह दिखाया गया है कि हमारे देश के गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। शिक्षा के क्षेत्र में जितना कार्य होना चाहिए उतना कार्य अभी तक नहीं हुआ है। गांव के स्कूलों में विज्ञान की शिक्षा की कमी है। गांव में परिवहन सुविधाएं न के बराबर हैं। गरीब एंव मध्यम वर्ग के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूर दराज शहरों में जाते हैं जिसके लिए उन्हें बहुत अधिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। इस कहानी में संयुक्त परिवार में होने वाली समस्याओं और चुनौतियों को भी दर्शाया गया है।