मॉरिशस के प्रतिभावान कथाकार अभिमन्यु अनत ने आधुनिक हिंदी कथा-साहित्य में अपना विशिष्ट स्थान बना लिया है। उनका यह उपन्यास उनके साहित्यिक व्यक्तित्व को नया आयाम प्रदान करता है।उपन्यास का नायक अमित भावुक है चिंतक है मजदूरों का नेता है। अमीर-गरीब के बाहर-भीतर के फासले से वह तिलमिला उठता है। मजदूर डेढ़ सौ साल बाद भी मजदूर ही है―एक बहुत बड़ी गोलाई की यात्रा जहाँ आदमी वहीं लौट आता है जहाँ से यात्रा शुरू करता है।अमित के जीवन की विडंबना यह है कि जिसे प्यार करता है उसी के पिता से गहरी जंग छेड़ रखी है।एक सशक्त उपन्यास जो बार-बार सोचने पर बाध्य करता है कि इस दुनिया में हमारी कोई हस्ती क्यों नहीं है?
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