‘है सुहानी भोर आगे’ मेरी काव्य रचनाओं का दूसरा संग्रह है। इसमें सम्मिलित कविताओं में प्रकृति उत्सव सामाजिक तथा मानवीय संवेदनाओं के स्वर प्रतिध्वनित हैं। छंद और लय के धरातल पर रची गई ये कविताएं पाठकों के मन को स्पर्श करेंगी ऐसा मेरा विश्वास है।वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव के कारण लेखन के क्षेत्र में नयी चुनौतियों के साथ अनेक अवसर भी प्रशस्त हुए हैं। जिनसे तालमेल बिठाते हुए साहित्य जगत निरंतर आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में यह काव्य संग्रह सुधी पाठकों को सस्नेह समर्पित है।