मोहसिन कुछ और पास आया और चिंगी ने भी थोड़े क़दम आगे लिए। एक तरफ़ होरमोंज का ज़ोर था और दूसरी ओर अचानक से बहुत ज़ोर की बारिश शुरू हो गई। चिंगी और चहक उठी। अब तो मौसम भी इशारे दे रहा था। अब मोहसिन और चिंगी एकदम आमने सामने खड़े थे। चिंगी मोहसिन से तीन इंच लम्बी थी पर अभी कोई ज़्यादा अंतर मालूम नहीं पड़ रहा था। गैराज की एक ओर की छत के कोने से हौले हौले पानी झिर रहा था। उसी तरह वक़्त भी बहुत धीमे धीमे सरक रहा था। चिंगी को कभी अपनी और कभी मोहसिन की पलकें झपकने का अहसास हो रहा था। बारिश के कारण हवा में हल्की से खुनक आ गयी थी पर चिंगी को अपने गालों पर पिघलती सी मुलायम गरमाहट महसूस हुई। टैक्सी में ‘मनमर्ज़ियाँ’ फ़िल्म का गाना चल रहा था ‘चोंच लड़ियाँ’। चिंगी को पता नहीं क्यूँ आज यह गाना बहुत प्यारा सा लग रहा था। जीवन जो मिल गया उस ने सोचा। पर ‘कुछ और’ भी तो हुआ था…! चिंगी ने वह सब सोचने नहीं दिया ख़ुद को। उस ने उस ‘कुछ और ’ से ध्यान हटाने के लिए गाने के बोलों पर ध्यान देना शुरू किया तो मन और तेज़ी से उधर ही दौड़ने लगा। चिंगी ने हार मान ली और नहीं रोका अपने आप को। सोचने लगी कि ‘मन और तन विच तुम्बी बजने’ का क्या मतलब होता होगा। उस ने महसूस किया कि उस के गाल गरम होने लगे हैं। सी-लिंक चढ़ते ही दोनो तरफ़ की खिड़कियों में से आती हवा मानो उसे उड़ा लिए जाने ही के आयी थी उस के सामने अपने दिमाग़ के सारे परदे खुल जाने दिए। और आँखें बंद कर ली। गाने में जैसे ही ‘ पोरस दे विच सिकंदर नाचे’ वाली लाइन आयी चिंगी चौंक के बैठ गयी। आँखें खोल ली और ख़ुद से बोली “ पागल तो नहीं हो गयी हूँ मैं? क्या बकवास है!” और बैग से किताब निकाल के पढ़ने लगी। सोलह साल की चिंगारी को पहली बार प्यार हुआ अपनी क्लास्मेट कुलसुम के चौदह साल के कज़िन मोहसिन से। हिम्मत जुटा कर चिंगारी ने अपने दिल की बात मोहसिन के सामने रखी ही थी कि उस अपने ख़ुद के परिवार के बारे में में एक चौंकाने देने वाली सच्चाई से रुबरू होना पड़ा। एक या ये कहें कि कई सारे स्कैंडल जुड़े थे उस के प्यारे और अनोखे परिवार से। लेकिन क्या था वो सच? किस तरह के स्कैंडल थे की चिंगारी उलझ कर रह गयी। और क़ुछ इस तरह के उस के भीतरी दुनिया के अंदर प्यार दोस्ती रिश्ते शादी इन सब के परिभाषाएँ उलझ गयी। सालों तक चिंगारी इन सब को समझने की ऐसी तलाश में मशग़ूल हो गयी ki अपने परिवार और अपने सबसे प्यारे दोस्त से अलग हो गयी। लेकिन मोहसिन फिर लौटा ज़िंदगी में। उलझनें और बढ़ गयी... मगर फिर ऐसा क्या हुआ कि चिंगारी को सवालों के जवाब सुनाई देने लगे? यह सब जानने के लिए पढ़िए नन्दिनी अरोड़ा का पहला हिंदी उपन्यास। नन्दिनी पेशे से स्क्रीन्प्ले राईटर हैं और '' उत्तरन '' ''बड़े अच्छे लगते हैं'' जैसे बहुत अन्य हिंदी सिरियलों के लिए लिखती रही हैं। हाल ही उन्होंने पाकिस्तान में जल्द ही रीलीज़ होने वाली एक फ़िल्म '' क़ुल्फ़ी'' के लिए एक गीत लिखा है।