इस पुस्तक के पहले भाग में भारतीय संस्कृति की विस्तृत जानकारी दी गई है। हमारी संस्कृति अनेकता में एकता का दर्शन कराती है। इसके दूसरे भाग में यह हमें सचाई से रूबरू कराती है। सत्य क्या है? वास्तव में भारतीय परंपरा के संत महात्मा सदियों से सत्य की खोज में ही लगे हुए हैं और हरेक दार्शनिक का लक्ष्य भी सत्य की खोज ही होता है और इस पुस्तक में इस खोज को पूर्ण किया गया है।.