डॉ. राधाकृष्णन् ने अपनी इस महान कृति में समझाया है कि हमारे महापुरुषों ने हमें आदर्शों की एक ऐसी परंपरा भेट की हैं कि जिनके प्रति हम सत्यनिष्ठ हों और ऐसी ही निष्ठा हमारी अपने आप पर भी हो तो हम इस समाज को सच्चा जीवंत और प्रेरक बनाकर अपनी विरासत की रक्षा कर सकते हैं।.