क्या इसमें कोई शक है कि इतिहास कुछ लोग लिखते हैं शेष जन इतिहास बनाते हैं? ये जन इतिहास किस प्रकार बनाते हैं? इस तरह कि इतिहास बनाते समय वे सचेत नहीं रहते हैं कि लो देखो हम इतिहास रच रहे हैं।’ वे सिर्फ जीवन वृक्ष पर फलते-फूलते हैं। गतिविधियों में संलग्न रहते हैं और भौतिक गतिविधियाँ ही उनका जीवन होती हैं। कोई अमूर्त निराकार और अपरिभाषेय जीवन नहीं। इसी को वाम में ‘वैज्ञानिकता’ कहा गया है। इतिहासकार किसे और क्यों याद करेंगे? यह इतिहासकारों की दृष्टि उनकी सम्बद्धता और प्रतिबद्धता सब पर निर्भर करता है। पेशेगत ज़रूरतों और चारों तरफ़ फैली ज़िन्दगी की ज़रूरतों के बीच वे अपनी सन्तुष्टि के बिन्दु तलाशते हुए इस काम को करते हैं। एक अर्थ में ‘वैज्ञानिक इतिहास’ भी पर्याप्त अवैज्ञानिक पाये गये हैं। एक ही विचारधारा और दर्शन पर केंद्रित होते हुए भी बिल्कुल विपरीत ध्रुवों पर एकदम विपरीत निष्कर्षों पर पहुँचते हुए इतिहासकारों को देखा जा सकता है।