वैश्य समाज से आने वाले श्रेष्ठ कवि काका हाथरसी व घनश्याम अग्रवाल के बाद अनिल अग्रवंशी इस पीढ़ी के श्रेष्ठ हास्य कवि हैं। इनकी कविताओं में बारीकियां सीखने के प्रति हमेशा जिज्ञासु रहता है। नई-नई कविताएं नए-नए विषय पर नए प्रतिमानों से कविता लिखने में वह एक माहिर कवि है। उसकी अधिकतर कविताएं मंच की बहुत प्रसिद्ध व श्रेष्ठ हास्य कविताओं में एक विशेष स्थान बना चुकी हैं। उसका हास्य नवीन व सहज होता है। उसकी कविताओं में मौलिकता है एक लय है। सूर्य भगवान मोटा पेट भिखारियों की टोर पंडित जी की लात विचित्र पुस्तक डोगियों की सभा पुलिस बच्चों के अंक मिठाई बाबा कवि की शादी व मच्छर आदि शुद्ध हास्य की सुपरहिट रचनाएं हैं।