स्त्री व पुरुष मिलकर एक संसार की रचना करते हैं और सदियों से उनका आपस में मेल ही इस समाज को आगे बढ़ा रहा है । कभी वे पिता और पुत्री के रूप में होते हैं तो कभी बहन -भाई के रूप में कभी प्रेमिका और प्रेमी के रूप में तो कभी पति पत्नी के रूप में और कभी दोस्तों के रूप में लेकिन हर परिस्थिति में वे अपने प्रेम समर्पण और त्याग से अपने परिवार व इस संसार को सजा -संवार रहे हैं । वे अपनी कोमलता दया और जुझारूपन के कारण सभी के उत्थान में सहयोगी बन जाते हैं। शिक्षित जागरूक व आशाओं से भरपूर स्त्री व पुरुषों की बदलती सोच ने सदा समाज को दिशा दी है।