डॉक्टर कमलेश मलिक जी बहुत ही संजीदा और जिंदादिल इंसान हैं। वे बहुत ही विनम्र और बेहतरीन व्यक्तित्व हैं। जितनी वो प्यारी हैं उतनी ही शानदार सामाजिक सरोकार वाली उनकी कविताएं हैं। साहित्य और कला उनमें सहज रूप से है। भाषा एवं संस्कृति का सौंदर्यबोध एवं नैसर्गिक निष्कपटता उनकी कविताओं में स्पष्ट दिखता है। कुल मिलाकर डॉक्टर कमलेश मलिक जी का यह कविता संग्रह पठनीय है और अपनी खास लाइब्रेरी में संजोकर रखने वाला है। इसमें विविधता है। नए-नए रंग है। जिंदगी का कोई भी पहलू अछूता नहीं है। वे किसी बनी बनाई लकीर की फकीर नहीं है। वो किसी स्टीरियोटाइप आइडियोलॉजी में नहीं बंधती बल्कि वे अपना रास्ता खुद बनाती है। --दीपक वोहरा