दूसरा सबेरा होने के पहले ही सूरज ढल गया! फिर से चाँदनी चौक पर और सफदरजंग के पास लोगों का जमघट शुरू हो गया। कानों कान खबर एक बवंडर के तरह फ़ैलाने लगी। शायद धरती का कोई कोना छूटा भी होगा ! पर यह तो एक शरुवात हुई थी; निर्माण से पहले ही एक विनाश लीला ; कुछ वैसा ही जैसे रावण का सिर्फ पुतला ही जला होगा; जैसे गंगा जी का एक बड़ा काम है मैल ढोना और सागरजी में लेजाकर डाल देना!