HINDI CINEMA KA SWARNYUG : PART 2 (HINDI)


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About The Book

हिंदी सिनेमा का स्वर्णयुग के प्रथम भाग ( कालजयी निर्माता-निर्देशक) के बाद दूसरा भाग (सदाबहार कलाकारों की दास्तान) आपके हाथ में है। हिंदी सिनेमा ने 1947 से 1970 तक सर्वकालिक लोकप्रिय फ़िल्में समाज को दी हैं। उस दौर के सिनेमा ने भावभंगिमा फ़ैशन प्रेम-विछोह के अनेक रूपक गढ़े हैं जिनसे भारतीयों का न सिर्फ़ मनोरंजन हुआ बल्कि उनके रहन-सहन और व्यक्तित्व भी प्रभावित हुए हैं। प्रथम भाग में राजकपूर और गुरुदत्त के निर्माता-निर्देशक कार्यों के साथ उनके फ़िल्मी सफ़र का भी लेखा-जोखा दे दिया है इसलिए उस दौर के अन्य सभी अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की फ़िल्मी दास्तान इस भाग में दी जा रही है। साथ में चुनिंदा खलनायकों और चरित्र कलाकारों के फ़िल्मी सफ़र को इसमें सम्मिलित किया जा रहा है। पुस्तक की सीमा होने के कारण उस दौर के सभी कलाकारों को समाहित नहीं किया जा सकता परंतु मुख्य कलाकारों की दास्तान उनकी प्रमुख फ़िल्मों सहित आप इसमें पाएंगे। इसी क्रम में हिंदी सिनेमा का स्वर्णयुग का तीसरा भाग - स्वर्णयुग की स्वर लहरियों की दस्तानों से सजी किताब शीघ्र ही उपलब्ध होगी।
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