इस संग्रह में शामिल कई कहानियाँ जंगल की पृष्ठभूमि पर लिखी गई हैं जो पशुओं और मानवों के समन्वय और साहचर्य के मूल्य का संदेश देती हैं। वर्तमान में विकास की सड़क पर जिस गति से हम भाग रहे हैं वहां मानव-वन्यजीव संघर्ष की खबरें अक्सर समाचार पत्रें टीवी और सोशल मीडिया में फ्लैश होती रहती हैं। हम अखबारों में खबर पढ़ते हैं कि अमुक गांव या शहर में कोई हाथी चीता या कोई जंगली जानवर घुस आया है लोग परेशान हैं प्रशासन बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। क्षण भर रुक कर खबर पर विचार करिएगा वो घुस आया है या हम मनुष्य उनके प्राकृतिक आवासों में घुसते जा रहे हैं? क्या केवल लोग परेशान हैं वह जानवर परेशान नहीं है? पर उनके पास रिपोर्टर नहीं हैं और उनके पास उनका अपना प्रशासन भी नहीं है। ऐसे में साहित्य वह माध्यम बनता है जो उस वन्यप्राणी के आंतरिक संघर्ष एवं परेशानियों से हमें अवगत कराता है। ‘बचपन की मित्रता’ ‘गज्जू’ ‘नन्हे जम्बो हाथी का अपहरण’ ‘शिकारी से बदला’ ‘हिरनुआ’ ‘मेरी रक्षा करो’ ‘मृग का उपचार’ ‘न्यारे दोस्त’ कहानियाँ इसी ढंग की मजेदार कहानियाँ हैं जो हमारे नन्हे पाठकों के लिए जंगल की एक खिड़की खोल देती हैं। जिसमें से वो झांक-झांक कर जंगल की दुनिया से परिचित होते हैं खिड़की से हाथ बाहर निकालकर अपने उन दोस्तों को स्पर्श करते हैं और असीम स्नेह तथा भरोसा पाकर खिड़की फाँद उन बेजुबान दोस्तों की तरफ खिंचे चले जाते हैं। ...ऐसी बहुत सारी छोटी-छोटी मीठी-सी शिक्षाप्रद गोलियाँ इस कहानी-संग्रह में छुपाई गईं हैं जिनकी मिठास बाल-पाठक को मोह लेगी।... --शुभी गुर्जर