हिया की बतियाँ अर्थात मन की बातें। मन में हज़ारों विचार एक साथ जब विचरते हैं तो उनमे से बस कुछ ही मस्तिष्क पर छाप छोड़ पाते हैं। बाकी पटल से गायब हो जाते हैं । कुछ विचार ही शब्दों का परिधान पहनकर कभी गद्य में तो कभी पद्य में सृजन का शरीर धारण कर पाते हैं। ये काव्य संकलन हिया की बतियाँ उन्ही विचारों का शब्द मूर्त रूप शरीर का जीवित रूप है।