यह पुस्तक जीवन की काले सागर की धुंध भरी यात्रा है। हमें जीवन के असली लक्ष्य को प्राप्त करना है। मानव के हृदयहीन होते रूप का वर्णन है। जीवन को ऊर्ध्वगामी बनाने का आह्वान है। यह पुस्तक जीवन को मनोरंजन से आत्मरंजन तक ले जाने का अनुनय है। पीड़ाकारी बनकर इस संसार की पीड़ा से मुक्त नहीं हो सकते। इंसान सा हृदय रखो।