प्रिय पाठकोनमस्कारयह मेरा पहला काव्य संग्रह हैं। जैसे कि मैं कोई कवि लेखक या समाज सुधारक नही हूँ मैं एक सैनिक हूँ जिस कारण मेरा कविता लेखन से दूर-दूर तक कोई भी रिश्ता नही हैं परन्तु मेरे आस-पास समाज मे होने वाली गतिविधियाँ जो मेरे हृदय को आहत या प्रसन्न करे उस समय मेरे अन्तर्मन से जो भाव उत्पन्न होते हैं वही भाव मैने अपनी इस काव्य संग्रह हृदय के उद्गार मे सम्मलित किये हैं। मुझे ना चाहते हुए भी कुछ शब्दो को बदल कर लिखना पड़ा जिसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ। मैं आहत होता हूँ जब समाज मे किसी विशेष प्रयोजन से बेटियों को लक्ष्य बनाकर पथभ्रष्ट करके मृत्यु के हवाले कर दिया जाता हैं। मेरी इच्छा हैं यह काव्य पुस्तिका हर घर पहुंचे और जनजागरण का रूप ले यह काव्य संग्रह मातृशक्ति को समर्पित हैं। धन्यवाद जय हिंद।