इस कहानी-संकलन की कहानियों में बनते-बिगड़ते मानवीय संबंधों का जबर्दस्त चित्रण हुआ है। जैसे कि परिस्थितियाँ कई बार ऐसा मोड़ लेती हैं कि अपने परायों में तब्दील हो जाते हैं . . . समय ऐसा अंतराल पैदा करता है कि वर्षों बाद पुराने शहर में जाने पर पूर्व प्रेमिका से मिलने का भी संयोग नहीं बन पाता . . . जिन बच्चों को माँ-बाप अपना पेट काटकर बड़ा करते और काबिल बनाते हैं बुढ़ापे में कई बार वे ही बच्चे उन्हें खाने के लिए भी तरसा देते हैं . . . पत्नी पति से काम कराने के तरीके ढूँढ़ ही लेती है . . . गलत के खिलाफ़ बोलने वाले की छवि ऐसी बन जाती है जैसे वह सब जगह काम बिगाड़ता फिरता हो . . . आदि।
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