मेरी यह काव्य संग्रह ‘इंद्रधनुष के अंतर्मन की आवाज’ के माध्यम से मैं संजय कुमार यादव सभी पाठक वर्ग के सामने समाज के एक उपेक्षित वर्ग की पीड़ा को एक नए अनुभव के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूं| यह काव्य संग्रह उपेक्षित वर्ग के पीड़ा का अनुभव कर मेरी मन की गहराई से उभरे विचारों और भावनाओं का एक चित्र है| इसमें संकलित कविताएं उपेक्षित वर्ग के जीवन के विभिन्न दुख दर्द और समय-समय पर ठोकर खाती भावनाओं को व्यक्त करती हैंजो हमारे समाज के एक अभिन्न अंग होने के बावजूद भी हमसे दूर रखे जाते हैंमेरी यह काव्य संग्रह उनके मन में रह-रह के उठने वाले प्रश्नों और विचारों को अपने अन्दर समेटें समाज के समक्ष उनकी भावनाओं और विचारों को प्रस्तुत करने में सहायक होगी | संग्रह की प्रत्येक कविता एक विशेष विचार और संवेदना को साथ लिए पाठकों को उपेक्षितों के प्रति भावनात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास करेगी|