राजेन्द्र सजल की कविताओं के प्रेम का दायरा बहुत व्यापक है। उसमें प्रेयसी है पत्नी है माँ बेटी बहन प्रकृति और सृष्टि का कण-कण है। अतः राष्ट्र प्रेम से वो कैसे दूर रह सकते हैं। उनका राष्ट्र प्रेम तथाकथित राष्ट्रवादियों से अलग तरह का है। उसमें दिखावा नहीं और न ही किसी तरह का छलावा है।...कवि के हृदय में गहरी कसक है। इसलिए उसकी लेखनी किसान व उसके खेत-खलिहान आदिवासी और उसके जल जंगल जमीन को बचाने को बेताब है। उसे मजदूर पर होता अत्याचार दलित के साथ होती अस्पृश्यता उसकी बस्तियां जला देना स्त्री के साथ बलात्कार भूख से दम तोड़ते इंसानों की पीड़ा कतई बर्दाश्त नहीं। इसलिए कवि सत्ता के हर एक षड्यंत्र का पर्दाफाश करता है।...इस संग्रह की कविताओं के माध्यम से कवि सजल युद्ध उन्माद संस्कृति न्याय नैतिकता व्यभिचार आदर्श जाति वर्ण आदि शाश्वत मुद्दों पर सवाल उठाते हैं जो आज भी मनुष्य के सामने ज्वलंत प्रश्न बनकर निरूत्तर खड़े हैं। ...अस्तु! राजेन्द्र सजल की कविताएं बहुविध है। इनमें घर-आँगन गौरेया से लेकर वृक्ष नदी पहाड जंगल आदि सबकी चिंता है। उनकी सबसे बड़ी चिंता मनुष्य में प्रेम तत्त्व बचाने की है --प्रो.(डॉ.) किशोरी लाल ''पथिक''
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