उपन्यास ‘इश्क़ एक्सप्रेस’ की कहानी सत्य घटनाओं पर आधारित है। लेखक की क़लम से काग़ज़ पर कहानी उतर जाने तक का सफ़र आसान नहीं होता। कुछ की तो ज़िंदगी गुज़र जाती है और फिर भी सफ़र अधूरा ही रह जाता है। हर कहानी का अपना एक सच होता है जो पूरे सफ़र में लेखक को बार-बार कल्पनाओं के सागर में गोते लगाने में बाधा बनता है। लेखक कितनी ही कोशिश कर ले कहानी का सच उसे एक मुकाम तक पहुँचा ही देता है। लेकिन कभी-कभी कुछ कहानियाँ अपने आप में इतना कुछ समेटे होती हैं कि कुछ पन्नों में समेटने में लेखक असफल ही रहता है। इश्क़ एक्सप्रेस भी एक ऐसी ही कहानी है।.