इससे पहले भी हिंदी कविताओं पर मेरी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनके नाम हैं- ‘तेरे संग...तेरे बिन...’ तेरे इश्क़ में...' ‘दिल से दिल तक' 'वो लड़ती है...झगड़ती है...' और अब हिंदी कविताओं पर ये पाँचवीं पुस्तक 'इश्क़ हमारा... किताबों सा' आपके हाथ में है। मैं अधिकतर प्रेम और आपसी संबंधों पर लिखता हूँ। खास कर जीवन के उन भावनात्मक पहलुओं पर जिन्हें हम रोज़मर्रा की भाग-दौड़ में कहीं पीछे छोड़ देते हैं। इन कविताओं के माध्यम से मेरी कोशिश बस इतनी सी है कि हम अपने पारिवारिक जीवन में उन भावों को दोबारा जी सकें जिनके लिए एक समय में हम पागलों सा व्यवहार करने से भी नहीं चूकते थे और वो भाव है 'प्रेम'। जीवन की नीरसता और उदासीनता को मात्र प्रेम से ही दूर किया जा सकता है। जब हम प्रेम में होते हैं तो किसी तीसरे के बीच में आने की एवं शक की किसी भी सम्भावना का भी खुद ही अंत हो जाता है। जिन परिवारों में प्रेम होता है वहाँ मानसिक शांति होती है और जब आप मानसिक रूप से शांत होते हैं तब जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता की सम्भावनाएं भी खुद-ब-खुद बढ़ जाती हैं।