यह उपन्यास इश्क़ और फ़र्ज़ के टकराव की कहानी है - जिसमें एक विधवा का अकेलापन एक सीक्रेट एजेंट का मिशन और सत्ता की साज़िशें एक-दूसरे में उलझती जाती हैं। कहानी का मक़सद सिर्फ़ रोमांच पैदा करना नहीं बल्कि उन ख़ामोश सवालों को भी आवाज़ देना है जो हमारे समाज संबंधों और नैतिकताओं के बीच हर रोज़ पैदा होते हैं। शहर की चमक-दमक वाली पॉश कॉलोनी में जहाँ ऊँचे-ऊँचे महल जैसे घर खड़े थे एक गहरा रहस्य छिपा हुआ था। रात के अंधेरे में सड़कें सुनसान हो जातीं लेकिन दिलों में तूफान मचा रहता। वीरेश रंधावा एक युवा आईएएस अधिकारी और सीबीआई का गुप्त एजेंट इस कॉलोनी में एक साधारण किराएदार बनकर आया था। उसका चेहरा इतना मासूम था कि कोई सोच भी नहीं सकता था कि उसके अंदर एक योद्धा छिपा है।