इतिहास के हर काल खंड में अच्छा बुरा समय रहा है | और यही समय हमारी सर्जना और रचना कर्म की आधार भूमि बनता है | जिसे हम अपना आदर्श समय मानते हैं रामायण और महाभारत काल का युग वह तो स्त्रियों और शूद्रों के अपमान की द्रष्टि से सबसे खराब समय था जब द्रोपदी को भरी सभा में नंगा किया गया गर्भवती सीता को वनवास भेजा गया और तपस्वी शूद्र शम्बूक की अयोध्या के राजा राम द्वारा उनकी हत्या की गयी | हर युग में दो धाराएं रहीं हैं एक यथास्थितिवादी रूढ़ग्रस्त स्वार्थी परम्पराओं पर आधारित और दूसरी प्रतिरोध की धारा जो बेहतरी के लिए बदलाव के लिए संघर्ष की धारा है | इन दोनों धाराओं में टकराहट हमेशा से रही है और आज भी बरक़रार है और आगे भी रहेगी | मौजूदा समय वैचारिक घाटे अर्थात आइडियोलोजिकल डेफिसिट का समय है |