‘इत्र की शीशी एवं अन्य कविताएँ’ अभिषेक ‘अब्र’ का पहला एकल काव्य संग्रह है। इसमें उनकी चयनित 45 कविताएँ हैं। सभी कविताएँ अलग-अलग मिजाज और रंग-रूप की हैं। कविताएँ मानव जीवन और दर्शन समाज प्रेम और विरह कोरोना और भी कई विषयों पर हैं। उन्होंने पूरी ईमानदारी से अपने भावों को व्यक्त किया है। उनकी कविताओं में कहीं कोई आडम्बर नहीं होता अनावश्यक ताम-झाम नहीं होता। वह सही अर्थों में एक कलाकार हैं और अपनी सहज लेखन प्रतिभा से हर पाठक को प्रभावित करते हैं।