भारत मे चाहे वो सिख, जैन,बौद्ध, ईसाई,आर्य, द्रविड या फिर मुस्लिम समुदाय के भिन्न-भिन्न लोग ही क्यों न हो, वे सब के सब अपने आप को एक दूसरे से अलग मान रहे है। वस्तुस्थिति यह है कि हमसब कोई अलग नही है तथा एक ही परिवार के बिछड़े हुए सनातनी लोग है। इसी उद्देश्य को लेकर मैने इस काव्य संग्रह ‘‘जागो हिन्दुओं ‘‘ की रचना की है जिसमें आपको कुछ शब्द भले ही कठोर लगे किन्तु वास्तव मे यह उन लोगों के लिए आवश्यक है जिन्होंने हमारे देश की महान संस्कृति और स्वाभिमान पर प्रहार कर हमारे सनातन समाज को छिन्न-भिन्न कर कमजोर कर दिया है। इस काव्य संग्रह में केवल यही आह्वान है ‘‘ एक बनो और श्रेष्ठ बनो ‘‘ । कृण्वन्तो विश्वमार्यम् ।
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