Jaal Samaeta
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About The Book

बच्चन जैसे भाव-प्रवण कवि समय के साथ अपनी कविताओं को अनेक रंगों में चित्रित करते हैं। 'जाल समेटा' की कविताएं उन्होंने 1960-70 के दशक में लिखी थीं। लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच कर जीवन की वास्तविकता के संबंध में उनके मन में अनेक भाव उठे। 'जाल समेटा' में उनकी इन भावनाओं को सजीव करती उत्कृष्ट कविताओं को पढि़ए। बच्चनजी के शब्दों में 'मेरी कविता मोह से प्रारंभ हुई थी और मोह-भंग पर समाप्त हो गयी।'
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Details

ISBN 13
:
9788170287988
Publication Date
:
01-01-1991
Pages
:
72
Weight
:
97 grams
Dimensions
:
140x216x4.46 mm
Publisher