आज जिस स्वतंत्र लोकतान्त्रिक समाज और समय में हम सांस ले रहे हैं वह न जाने कितने वर्षों की विदेशी आक्रान्ताओं की गुलामी के बाद उनसे हुए संघर्ष और बलिदान की ऐसी कहानियों से मिलकर पाई गई स्वतंत्रता है जिसके विषय में हमारी वह पीढ़ी बहुत कम जानती है जो सन 1947 के बाद जन्मी है। इस आजादी को हासिल करने के लिए न क्या मोल चुकाया गया है क्या-क्या बलिदान हुआ है कितने त्याग और संघर्षों की आहुति दी गई है यहजानना हम सअब के लिए बेहद जरूरी है। यह एक अनन्तिम सूची है ऐसे सेनानियों को उनके जीवन वृत्त और योगदान को सामने लाने का प्रयास जारी रहेगा। इसे दो भागों में बांटा गया है– प्रथम 1857 के संग्राम के योद्धा और दूसरे 1857 से 1947 के मध्य विभिन्न स्वतंत्रता आंदोलनों या गतिविधियों के उत्तर प्रदेश के सेनानी। शायद आपके आसपास भी ऐसे प्रेरणाप्रद लोग रहे हों जो आज विस्मृत हों पर आपको उनके विषय में कुछ जानकारी हो तो अवश्य बताइये। हम उन्हें अपनी इस श्रृंखला में सम्मिलित करने का प्रयास करेंगे।