प्रहरी राही चल वंदे भारत के बाद यह कवि का चौथा काव्य-संग्रह है। इस पुस्तक में इंद्रधनुषी रंगों को ऐसी बेबाकी बारीकी और सहजता से सजाकर रखा गया है कि हर रंग जिन्दगी के खट्टे-मीठे अनुभवों को अपने दायरे में समेटता हुआ नजर आता है। पाठकों को इन बहुरंगों से सराबोर करना एवं काव्यात्मक लयों से उनके ह्रदय के कोमल तारों को झंकृत करना ही पुस्तक का मुख्य उद्देश्य है।
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